जैसलमेर. राजस्थान में अगर जैसलमेर नहीं देखा तो क्या देखा। कुछ ऐसा ही कहना है राजस्थान को देखने और समझनेवाले घूमक्कड़ों की। कई लोग तो ये भी कहते हैं कि जिसने जैसलमेर की जमीं को स्पर्श नहीं किया। वो राजस्थान को नहीं समझ पाएगा। यही सोच मेरा दिल भी सालों से जैसलमेर घूमने का था। यात्रा की कहानी तो कहीं और बताउंगा। सबसे पहले दिखाता हूं पाटवा की हवेलियां।

पाटवा की हवेलियां जैसलमेर शहर में ही है। १९ वीं शताब्दी में इन हवेलियों को बनाया गया था। इनमें गजब की नक्काशी की गई है। खिड़कियों से लेकर दरवाजे को देखकर आपका मन यहीं थम जाएगा। छोटी-छोटी खिड़कियों से आपको अलग दुनिया नजर आएगी। कहीं इतिहास में डूबते हुए आप खुद को पाएंगे।सोने और चांदी से कई जगह महीन कारिगरी दिखती है। हवेलियों के ऊपर से जैसलमेर शहर बेहद खूबसूरत नजर आता है। सभी मकान का रंग एक समान ही दिखता है। क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए गए पत्थर का रंग ही एक है।

यहां के लोगों का कहना है कि पाटवाओं ने इन हवेलियों को रहने के लिए बनवाया था। इसमें ड्राइिंग रूम, गेस्ट रूम, खाने का कक्ष, विश्रामालय, बरामदा सभी करीने से बनाया गया है। इन हवेलियों में कई काफी बड़े हैं। जबकि, कई छोटे भी हैं। कई हवेलियों में बेल्जियम के ग्लास का काफी इस्तेमाल हुआ है। जो इसकी खूबसूरती को बढ़ा देता है।

पाटवा की हवेलियां देखने के लिए बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं। आस-पास राजस्थानी ड्रेस में फोटों खींचाते पर्यटक नजर आते हैं। राजस्थानी गाना गाते कई लोग आपको यहां दिख जाएंगे। वे कल्चरल म्यूजियक को बड़े ही मजे से सुनाते नजर आते हैं।रंगबिरंगी राजस्थानी पगड़ियां यहां बिकती नजर आती है।पाटवा की हवेली से सोनार का किला बेहद आकर्षक दिखता है। धूप आते ही सोने की तरह किला चमकता दिखता है।

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