भाग-दौड़ कर चुका बहुत तू…..
एक पल का सांस तो ले…..
इमारतों का अपने सम्राज्य को छोड़….
चल सफर पर चलते हैं…..

मनुष्य बहुत जल्दी किसी भी चीज से ऊब जाता है.समान्य तरह से भी अगर आप देखे तो पाएंगे की एक ही काम आप लगातार नहीं करसकते. आपको आराम चाहिए और साथ ही तरीको मे बदलाव भी. खुश होना, रीलैक्स करना सभी की जरुरत है. आज के इस भाग-दौड़ की जिन्दगी में तो और भी. इंसान क्या हासिल करना चाहता, उसके मन के अंदर की बेचैनी और छटपटाहट को कोई नहीं समझ सकता – सिवाय खुद. ऐसे में स्वयं को तलाशने का सबसे बेहतरीन माध्यम है यात्रा.

शौक नहीं दवा भी है सफर
इसे महज एक शौक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए .किसी थैरपी की तरह है,ये सफर. जो आंखो से होकर दिल मे उतर जाता है. कुछ समय के अंतराल पर सफर करने वाले लोग अधिक खुश पाए गए. जिसने ना सिर्फ उनके व्यकितगत पर साथ ही व्यवसायिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला. FRAMINGHAM हार्ट स्टडी के अनुसार सालाना सफ़र पर जाने वाले लोगों मे हार्ट अटैक की संभावनाएं कम पाई गई.क्योंकी सफर तनाव को दूर करता है.जलवायु और वातावरण का बदलाव शरीर के लिए अच्छा है.स्थान परिवर्तन मानसिक तथा शरीरीक स्वस्थ के लिए लाभकारी है. Depression जैसी समस्या जो आम हो चली है, सफर की बूटी के आगे दम तोड़ती नज़र आती है. हमसफर सा ख्याल रखता है सफर ये मानो.

जिंदगी को जिंदा बना कर रखती है यात्रा
“ बंद दीवारों में दुनिया नहीं समेट सकते…
बारिश की बूंदों को महसूस करने को….
भींगना तो होगा तुम्हे….”
किताबों में उकेरे हुए समंदर अगर जीवंत हो, लहरो संग गुदगुदाए
तो, उसकी बात ही कुछ और है.
डर के आगे जीत है
सफर का हर पहलू अपने आप में सीखाने का बेहद खुबसूरत माध्यम है, जहां पूरा सफर ही आपकी कक्षा है और हर मोड़ आपका शिक्षक. कितनी भी प्लानिंग कर ले लेकिन आप पूरी तरह से नहीं कह सकते की सब मन मुताबिक हो. नयी चुनौतियों को स्वीकार कर उससे उभकने की क्षमता विकसित करता है, सफर. समय मैनेज करना,शारीरीक श्रम, खुद की सूझ-बूझ से फैसला लेना, जाने कितनी चीजों की परख होती है. गलती हो फिर भी आप सीखते ही है. क्योंकि आप अपने बसाये सम्राज्य से दूर रहते हैं.

वर्तमान में रहना सिखाता है, सफर
सफर हमे भयमुक्त हो नयी गलियों, नए शहर से जुड़ने को ले जाता है. बिना किसी दबाव के, छोटे बच्चे की तरह आप हर चीज को आश्चर्य की नज़रों से देख, सवाल पूछते हैं और समझने का प्रयास करते हैं. सफर हमें भिन्नताओं से अवगत करता है और साथ ही जोड़ते भी है. अलग पहनावा खान-पान, रहन-सहन हमे आकर्षत करते है. विभिन्न

सोच में आएगा बदलाव
संस्कृति और विचारधाराओं का आदान-प्रदान का माध्यम होती है ये य़ात्राएं. इस प्रकार की गतिविधियों से, एक अनोखी क्षमता उत्पन्न होती है. यात्रा सहिष्णुता को बढ़ावा देती है. दुनिया को देखने का नजरिए मे बदलाव लाता है और संसार को सहजता से स्वीकार करने की क्षमता भी. हम उन लम्हों को अपने कैमरे में कैद करना चाहते है, क्योंकि वे खूबसूरत हैं, हमें आज़ाद और खुशनुमा महसूस कराते हैं. भाग-दौड़, थकान से भरी यात्रा यादों के रुप में हमें गुदगुदा जाती है. हम सभी रोबोट नहीं है, जीवीत है. उस जीवतंता को कायम रखने का काम करती है यात्राएं.
लेखिका पूजा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में जनसंचार की छात्रा हैं. साहित्य, यात्रा और अध्यात्म में खास रूचि रखती हैं

इमारत ‘ठहराव’ है और सफर ‘प्रगतिशील जीवन’!
आपकी लेखनी भी ‘सफर’ की तरह ‘जीवंत’ है।
This is a great post – So clear and easy to understand …
पूजा जी ने आपने मेरी मन की भावनाओं को शब्दों में व्यक्त कर दिया ।
साधुवाद।
धन्यवाद।