गुजरात की घुमक्कड़ी का ये तीसरा पार्ट है. इसमें पत्रकार राहुल देव आपको सौराष्ट्र की संगम से आपकी मुलाकात कराएंगे. अभी तक तो संगम का नाम सुनते ही सबसे पहले प्रयागराज जेहन में आता होगा. लेकिन, अब गुजरात के त्रिवेणी संगम से मिलिए.

तीन नदियों का संगम
मशहूर सोमनाथ मंदिर देखने के लिए अगर आप यहां आते हैं. तो सिर्फ ज्योतिर्लिंग का दर्शन करके वापस नहीं लौटे. यहां से कुछ ही दूरी पर त्रिवेणी घाट है. इसे तीन पवित्र नदियों का संगम कहा जाता है. कपिल, हिरण और सरस्वती नदी का मिलन होता है. और प्रकृति का मिलन तो हमेशा से खूबसूरत रहा है. शाम हो या सुबह यहां संगम किनारे बैठने में जो सुकुन मिलता है. उसका एहसास आप बहुत ही कम जगहों पर जाकर कर सकते हैं.

उद्गम स्थल की नहीं जानकारी
लोकमान्यताओं के मुताबिक तीनों नदियों यहां से समुद्र के अंतिम गंतव्य तक बहती हैं. यह मानव जन्म, जीवन और मृत्यु का प्रतीक है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घाट में स्नान करने से सभी शापों से मुक्ति मिलती है और पूरे जीवन में बीमारियां नहीं होती हैं. हालांकि, ये नदियां कहां से आती हैं. इसके बारे में कोई जानकारी नहीं देता है.

भलका तीर्थ का भी करें दर्शन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की मौत तीर लगने से हुई थी. कहा जाता है कि इसी जगह पर कृष्ण भगवान को तीर लगी थी और उन्होंने शरीर का त्याग किया था. इस मंदिर को भलका तीर्थ बोलते हैं. यहां एक प्रतिमा बनी हुई है. तीर मारनेवाला बहेलिया भगवान से माफी मांगने की मुद्रा में बैठा हुआ है. इस मंदिर में दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

हजारों साल पुराना पीपल का पेड़
भलका मंदिर परिसर में काफी पुराना पीपल का पेड़ है. कहा जाता है कि इसकी उम्र करीब 5 हजार साल होगी. सबसे खास बात ये है कि ये पेड़ कभी सूखता नहीं है. इसकी छांव में बैठने का सुख ही अलग है. मन शांत हो जाता है. हर वक्त यहां पर ठंडी हवा का झोंका चलते रहता है.
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अभी जाइए नहीं..सैर करते रहिए राहुल देव के साथ गुजरात के कई लोकेशन अभी बाकी है…
