पिछले पार्ट में मलाना गांव तक पहुंचने की यायावरी बताई गई थी. यहां एक दिन और रात बिताया हूं. इसकी कहानी आगे बताऊंगा. मलाना से वापसी की यात्रा ज्यादा रोमांचक और साहसिक है. इससे पहले मलाना गांव की कुछ सच्चाई बताता हूं.

गूगल सर्च से अलग है सच्चाई
इंटरनेट पर कई ब्लाग्स और लेख मलाना के बारे में मिलते हैं. इनकी जानकारी और सच्चाई में कई अंतर है. यहां के लोग पहले की तरह नहीं है. गूगल पर सर्च की गई जानकारी के मुताबिक लोगों को यहां आप टच नहीं कर सकते हैं. ऐसा करने पर जुर्माना लगाया जाता है. लेकिन, सच्चाई इससे थोड़ा अलग है. अब ग्रामीण आपसे बात भी करते हैं. उनको आप टच भी कर सकते हैं. हां, कुछ बुजुर्ग जरूर परहेज करते हैं. दुकानदारों के बारे में मीडिया रिपोर्ट में कहा जाता है कि पैसे जमीन पर या दूर से दिए जाते हैं. लेकिन, सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. आम शहरों और गांवों की तरह यहां भी दुकानदारों से सामान खरीद सकते हैं. टूरिस्टों के लिए भी ग्रामीणों के दरवाजे अब खुल गए हैं. कई ग्रामीण अपने घरों में रहने की व्यवस्था भी कर देते हैं. कम पैसे में टूरिस्ट यहां ठहर भी सकते हैं.

अफीम ही नहीं राजमा की भी खेती
गांव की खूबसूरती इंटरनेट से बताई जाने वाली जानकारियों से ज्यादा है. ग्रामीण यहां अफीम(मलाना क्रीम) की खेती करते हैं. मलाना क्रीम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. हालांकि ग्रामीण इसकी खेती भी छिप कर करते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक कई बार प्रशासन हेलिकॉप्टर से भी अफीम की खेती पर नजर रखते हैं. यहां पहाड़ियों पर ही खेती की जाती है. अफीम के अलावा कई फसल लोग तैयार करते हैं. खासकर, दाल की जगह पर राजमा लोग खाना ज्यादा पसंद करते हैं. सर्दी और गर्मियों में ग्रामीण का निवास स्थान भी बदल जाता है. गांव के बच्चों ने बताया कि गर्मी के समय खेती की ओर लोग चले जाते हैं. वहां. फसल का देखभाल भी करते हैं. दूसरी पहाड़ियों की ओर कई घर दिखते हैं. ग्रामीणों के बताया कि वहीं गर्मियों में समय बीतता है. बच्चों की पढाई के लिए गांव में एक स्कूल है. लेकिन, पढ़ने के लिए वहां बच्चे न के बराबर जाते हैं. ग्रामीणों में भी शिक्षा को लेकर रूचि नहीं है.

मंदिर को नहीं कर सकते हैं टच
सभी घरों में लकड़ियों को सहेज कर रखा जाता है.. क्योंकि बर्फबारी के दौरान सबसे ज्यादा यही काम देता है. एक और खास बता ये है कि यहां के लोग खुद को अलेक्जेंडर का वंशज मानते हैं. उनका मानना है कि भारत से वापसी के दौरान कुछ सैनिक यहीं रह गए थे. स्थानीय लोगों के साथ मिलकर रहने लगे. इसमें कहां तक है. इसकी जानकारी मैं भी नहीं दे सकता. यहां के लोग प्रकृति और जगदम्बिका श्रिषि की भी पूजा करते हैं. इन्हें गांव का देवता कहा जाता है. ग्रामीण बताता हैं कि किसी भी विपत्ति की स्थिति में वहीं सहायता करते हैं. गांव के बीच में जगदम्बिका श्रिषि का एक कमरा बना हुआ है. यहां मंदिर को छुना सख्त मना है. टूरिस्ट भी मंदिर में पूजा या देवता को टच नहीं कर सकते हैं. फोटों खींचने की तो सख्त मनाही है. नियम तोड़ने पर 2500 जमा करना होता है.

पेड़ों की नहीं करते हैं कटाई
गांव के ही कुछ युवाओं ने बताया कि यहां स्थानीय लोगों का शराब पीना बैन है. अगर कोई मलाना का निवासी शराब पीते पकड़ा जाता है तो उसे दंडित किया जाता है. जबकि, ये नियम बाहर के लोगों के लिए नहीं है. स्थानीय लोगों का व्यवहार काफी अच्छा है. पर्यटकों से वे काफी मजे से बात करते हैं. हालांकि, भाषा की वजह से कुछ लोग चाहकर भी चर्चा नहीं कर पाते. सबसे खास बात ये है कि पैसों को लेकर यहां के लोगों में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं है. अधिकांश लोगों की तरह वो ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने में विश्वास नहीं करते हैं. लेकिन, बाहरी लोगों के आने से यंग जेनरेशन में बदलाव आया है.यहां के लोग कुछ विशेष प्रजाति के पेड़ों की पूजा करते हैं. उन पेड़ों को वो कभी काटते नहीं है. इनका मानना है कि जगदम्बिका श्रिषि इन पेड़ों पर वास करते हैं. उनकी इस मान्यता की वजह से पेड़ों का बचाव होता है. हिमाचल के इस गांव में बिजली की व्यवस्था है. लोगों के हाथों में मोबाइल भी दिखता है. कई यंगस्टर बॉलीवुड के गानों का लुत्फ भी उठाते दिखे.

आयुर्वेदिक दवाओं का भी इस्तेमाल
आयुर्वेदिक दवाओं का भी यहां के लोग खूब इस्तेमाल करते हैं. इसकी खेती भी होती है. मलाना क्रीम के साथ-साथ इसे भी लोग बेचते हैं. हैरानी की बात ये है कि छोटे-छोटे बच्चे भी अफीम बेचते दिख जाते हैं. बुजुर्ग, युवा और महिलाओं के पास हमेशा मलाना क्रीम होता है. बाहरी लोगों को देखते ही वो आपके पास आ जाएंगे और मलाना क्रीम दिखाकर दाम बताना शुरू कर देते हैं. देखने में तो ये बिल्कुल काला पत्थर की तरह लगता है. बच्चे तो माल…माल…माल करके चिल्लाते हुए टूरिस्टों के पास पहुंचते हैं.

नई संस्कृति से मुलाकात
आमदनी का सीधा सोर्स उनके लिए मलाना क्रीम ही है. आपके गेस्ट हाउस के आस-पास भी मलाना क्रीम रखे हुए वो मंडराते दिखेंगे. खऱीदार के कहने पर वो खुद से भी बनाकर पिलाते हैं. साथ ही क्रीम की तमाम खूबियां बताते हैं. अगर एक नई संस्कृति, तहजीब से आपको मिलना हो तो इस गांव की ओर रूख कर सकते हैं. नैचुरल ब्यूटी के साथ-साथ मलाना के ग्रामीणों से मिलना आपको अलग अनुभव देगा….
अगली कड़ी में पढ़ें जब मलाना गांव में बिछा बर्फ का चादर…
