अब तक आपने पढ़ा शिमला में योगी जी के साथ हुई घुमक्कड़ी और हिमाचली संस्कृति की एक बानगी. अब पढ़िए शिमला से कुफरी की मजेदार यात्रा

कुफरी की आबादी काफी कम है. इसकी वजह से यहां नेचुरल ब्युटी शिमला से ज्यादा है. महज 25 किमी की दूरी पर आप हिल स्टेशन का जबरदस्त लुत्फ उठा सकते हैं. पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाने में आपको ज्यादा से ज्यादा डेढ़ घंटे लगेंगे. जबकि, अपनी गाड़ी से महद 1 घंटे में पहुंच जाएंगे. हालांकि किसी शहर से रूबरू होना हो तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही इस्तेमाल ज्यादा सही होता है. यही सोचकर 20 का टिकट लेकर बस में सवार हो गया और खिड़की वाली सीट लपक ली. पहली बार कहीं जाना है तो खिड़की सीट ही बेल्ट होती है. शिमला से निकलते ही हसीन वासियों की शुरुआत हो गई. पहाड़ियों के बीच से निकलती गाड़ियों को देखकर काफी मजा आ रहा था. कभी-कभी डर भी लग रहा था कि जरा सा बैलेंस बिगड़ते ही कहानी खत्म है.खैर नेचर की खूबसूरती का लुत्फ उठाया हुए कुरी पहुंच गए.

बस से उतरता कुछ देर तक चारों ओर निहालचा रहा. गजब की खुशी मिल रही थी. यहां कोई शोरगुल नहीं था. लोगों की भीड़ नहीं दिख रही थी. मेन रोड से करीब 3 किसी चलने के बाद आप एक स्टैंड तक पहुंचते हैं. यहां तक प्राइवेट गाड़ियों से भी आया जा सकता है. इसकेनबाद शुरू होता है कुफरी का असली एडवेंचर. यहां से करीब 10 किमी पहाड़ी पर चढ़ना है. या तो आप पैदल जा सकते हैं या फिर खच्चर और घोड़ों से. दोनों का अलग मजा है. मेरे पास भारी-भरकम बैग भी था. इस वजह से घोड़ा कर लिया. 300 किराया है इसका. पहुंचाने और लाने का. हर जगह की तरह यहां भी खच्चर की यात्रा रिस्की हो सकती है. एक ही शख्स कई खच्चर को एक रस्सी में बांधकर ले जाता है. फिर भी डर के आगे जीत है सोचकर मैं बैठ गया. पहली बार खच्चर या घोड़े की सवारी कर रहा था. इसलिए कभी-कभी डर भी लग रहा था. ऊपर से आने वाले लोग हौसला बढ़ाते हुए दिखते हैं. चट्टानों के बीच कीचड़ भरे रास्ते पर चलने में घोड़ों को भी दिक्कत हो रही थी. लेकिन, 45 मिनट में मैं कुफरी के मेन प्वाइंट पर पहुंच चुका था.

यहां एडवेंचर के कई स्पॉट दिख रहे थे. रोपवे, ट्रैकिंग, स्नो स्कूटर, पैरा जंपिग समेत कई मजेदार स्पोर्ट्स का लोग लुत्फ उठा रहे थे. हजारों फूट की ऊंचाई पर जहां आसमान और पहाड़ की चोटियां टकराती दिखता है. वहां की खूबसूरती ही गजब की होती है. कई पहाड़ी जानवरों की सवारी भी यहां कराई जाती है. लोग हिमाचली ड्रेस पहनकर फोटो क्लिक कराने में भी बिजी दुख रहे हैं. पहाड़ी के किनारे में कई दूरबीन लगे हुए हैं. इससे कुफरी और भी अच्छा दिखता है. हालांकि, इसके लिए आपको 150 खर्च करना पड़ेगे. यहां से 1 किसी आगे जाने पर सेबों का बयान है आप पैदल के अलावा मोटरबाइक से भी जा सकते हैं. बगान देखने के लिए भी टिकट की जरूरत है. यहां पर दो पहाड़ियों के बीच रोपवे लगा हुआ है.

बगान से आगे निकलने पर मुझे जमीन पर बर्फ के ढेर दिखे. दो दिन पहले ही यहां बर्फबारी हुई थी. शिमला की तुलना में यहां बर्फबारी ज्यादा होती है. अभी तक मुझे दर्शन नहीं हुए थे. किस्मत को दोष देते हुए मैं जमीन पर गिरे बर्फ के साथ ही कुछ फोटोज ले लिया. जो भी हो कुफरी आकर मजा आ गया. शिमला से ज्यादा दिल के करीब कुरी हो गया. करीब 3 घंटे तक घूमने के बाद वापस स्टैंड में आ गया. यहां पर टोकन दिखाया जाता है. इसके बाद ही उतरने के लिए घोड़ा या खच्चर मिलता है. कुफरी में खाने-पीने की पूरी व्यवस्था है. इसलिए बेफिक्र होकर आप भी कभी इस हिल स्टेशन का लुत्फ उठाइए.सही रहता हूं मारक मजा आएगा.
अगली कड़ी में पढ़िए रिज मैदान से जाखू मंदिर का सफर
