
कई दिनों से हैदराबाद के नजदीक किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन को सर्च कर रहा था. ऐसी जगह खोज रहा था. जो बिल्कुल नेचर के नजदीक हो. सबसे अलग और सैलानियों की भीड़ से अलग हो. तभी मुझे पापीकोंडालू के बारे में जानकारी मिली. गूगल पर सर्च करने पर एहसास हुआ कि मैं ऐसी ही जगह खोज रहा हूं.अब देर किस बात कि दो दिनों के लिए यायावर बनने की तैयारी शुरू हो गई. मेरे साथ चलने के लिए एक सहयोगी चंदन मिस्रा भी तैयार हो गए. दिन में तैयारी हुई,रात को 11 बजे के करीब सिकंदराबाद स्टेशन से ट्रेन थी. 5 घंटे का सफर था. लिहाजा, जनरल बोगी में ही यायावरी का लुत्फ उठाने का मन बना लिया.

पार्सल बोगी में सफर
स्टेशन पर पहुंचने के बाद अपनी ट्रेन के पास पहुंच गया. जनरल बोगी में काफी भीड़ थी. सीट मिलना मुश्किल लग रहा था. टीटी भी सीट देने से इनकार कर दिया. तभी मेरी नजर गार्ड पर पड़ी. उनसे बातचीत करने पर सामान वाले बोगी में चढ़ने की इजाजत मिल गई. बिना देर किए चंदन के साथ पार्सल बोगी में चढ गया. पहली बार इस बोगी में सफर कर रहा था. अंदर घूप अंधेरा था. मोबाइल की मदद से सामान रखनेवाले बेंच पर लेट गया. ट्रेन खुलते ही नींद आने लगी. बालांकि सीट नबीं होने की वजह से चोट काफी लग पही थी. फिर भी यात्रा का रोमांच को समझते हुए सोने की कोशिश करने लगा. गेट बंद होने की वजह से स्टेशन का पता नहीं चल रहा था. खैर, अंतिम स्टेशन भदरांचलम था और यहीं हमें उतरना भी था. झपकी आते-जाते 5 घंटे बीत गए. सुबह नींद खुली तो स्टेशन पहुंच चुका था. प्लेटफॉर्म पर उतरते ही पहाड़ों की ताजी हवा हमें नई जिंदगी देने लगी. भदरांचलम छोटा सा स्टेशन है. खूबसूरत उतना ही. हमने फटाफट कुछ फोटोबाजी की. फिर स्टेशन से बाहर निकल गए.


40 मिनट बस की सवारी
पापीकोंडालू जाने के लिए भदरांचलम से ही गाड़ी पकड़नी थी. पता चला कि ये भी मशहूर तीर्थस्थल है. रामायण से इसकी मान्यताएं जुड़ी हुई है.यहां भी माता सीता के साथ श्रीरामचंद्र ने कुछ समय बीताया था. भदरांचल मुनि को विष्णु के रूप में भगवान ने दर्शन दिया था. इतनी बातें जानते ही हम भी मंदिर दर्शन के लिए निकल पड़े.भदरांचलम स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 60 किमी है. ये शहर में ही गोदावरी नदी के किनारे है. बस से 40 मीनट का सफर तय करके मंदिर के पास पहुंचे. बगल में गोदावरी बहती दिखी.इस नदी ने यहां की खूबसूरती ही बढा दी है. मॉनसून में गोदावरी पूरे वेग में बह रही थी. लोग किनारे में डुबकी लगा रहे थे तो कई आस्था में सराबोर पूजा में व्यस्त थे. कई स्टिमर भी लोगों का इंतजार कर रही थी. कुछ देर तक घाट की खूबसूरती निहारने के बाद हम भी डुबकी लगाने के लिए निकल पड़े. हमेशा की तरह नदी में नहाते ही सारी थकान दूर हो गई.


करीब आधे घंटे तक तैराकी का लुत्फ उठाने के बाद बाहर निकल आए. इसके बाद मंदिर की ओर निकल पड़े. यात्रा के साथी चंदन भी भदरांचल पहुंचकर काफी खुश नजर आ रहे थे. घाट से 15 मिनट की पैदल दूरी तय कर मंदिर के पास पहुंच गए. साउथ इंडिया के अन्य मंदिरों की तरह यहां की भी भव्यता कम नहीं है़. मंदिर के अंदर और चारों ओर खूबसूरत नक्काशी की गई है. कई हिंदू देवी-देवताओं की पेंटिग बनी हुई है.जल्द दर्शन के लिए यहां भी वीआईपी पास मिलता है. 50 से 2 हजार तक का टिकट कटता है. हालांकि, लंबी लाइन देखकर मंदिर कैंपस से ही प्रणाम करना उचित समझा. क्योंकि, आगे का सफर लंबा था. यहां आने वाले भक्तों के लिए रहने की भी व्यवस्था है. 400 से लेकर 4 हजार तक के कमरे उपलब्ध है. मंदिर से दूर जाने पर कई बड़े होटल भी भदरांचलम में है. बताते चले कि भदरांचलम की गिनती साउथ इंडिया के बड़े तीर्थ स्थानों में होती है.


पापीकोंडालू की रोमांचक यात्रा
मंदिर से बाहर निकलते-निकलते सुबह के 10 बज गए थे. अब पापीकोंडालू निकलने की तैयारी करना था. पापीकोंडालू डॉयरेक्ट किसी भी गाड़ी से नहीं जा सकते हैं. यहां तक पहुंचने का एकमात्र जरिया स्टिमर और बोट है. स्टिमर की यात्रा ही बेहद हसीन होती है. इसे आप पूरी जिंदगी नहीं भूल पाएंगे. आप पापी श्रंखला की ऊंची और घने जंगलों के बीच से गोदावरी नदी में चलते हैं. जैसे-जैसे स्टीमर से आगे बढ़ेंगे लगेगा कि किसी खूबसूरत गुफा में इंट्री लेते जा रहे हैं. करीब 30 किमी गोदावरी में चलने के बाद स्टीमर पापीकोंडालू पहुंचती है. इस बीच कई आकर्षक और दिल को सुकुन देने वाली जगह को आप देखेंगे. मन ऐसा करेगा कि कोई यहीं रूक जाने को कह दे. ऐसी खूबसूरत यात्रा पर मैं अब भदरांचलम से निकलनेवाला था.

अगले पार्ट में पढ़ें भदरांचलम से पापीकोंडालू की शानदार यात्रा…

यात्रावृत्तांत के साथ छायाचित्रों का सार्थक प्रयोग किया गया है।