बापू की कर्मभूमि है यह आश्रम, 12 साल की यादों को संजोया गया है

देश के बापू, हमसब के राष्ट्रपिता और दुनिया के लिए महात्मा। जी हां, आज 2 अक्टूबर है। मोहन से महात्मा बने गांधी जी का जन्मदिन। बदलती हुई दुनिया में भी गांधी की प्रासंगिकता और ज्यादा बढ़ती जा रही है। देश से लेकर दुनिया तक गांधीवाद की चर्चा बढ़ गई है। गांधी की तो हत्या कर दी गई थी। लेकिन, उनके विचार, आदर्श और सोच आज भी मिसाल के तौर पर दुनिया के लिए उदाहरण है। महात्मा गांधी को किताबों से इतर समझना है तो एक बार उनकी कर्मभूमि जरूर आइए।

जिंदगी के 12 साल

महाराष्ट्र के वर्धा को महात्मा गांधी का कर्मभूमि भी कहा जाता है। यहां उन्होंने जिंदगी के 12 साल बिताए। आज उस जगह को सेवाग्राम आश्रम के नाम से पूरे देश में लोग जानते हैं। गांधी से जुड़ी हर यादों को बड़े ही अच्छे तरीके से संजोकर रखा गया है। आश्रम में प्रवेश करते ही आपके दिमाग में राष्ट्रपिता चलने लगेंगे। उनकी जीवनशैली से जुड़ी अनेक सामान को भी यहां संरक्षित किया गया है। गांधी जी के साथ उनकी पत्नी कस्तुरबा गांधी भी यहां रही थीं। सभी का रहना कुटी में होता था। इस वजह से यहां आज भी उन कुटियों को सुरक्षित रखा गया है। सभी कुटियों का अलग-अलग नाम दिया गया है।

इस कुटी में बैठकर ही बापू कार्यालय का कामकाज करते थे.

कुटियों का जीवन

महात्मा गांधी को इस जगह रहने की व्यवस्था जमनालाल बजाज ने कराई थी। उन्हीं के अनुरोध पर बापू यहां आए थे। फिर करीब 12 साल तक यहीं रहें। देश भर के तमाम बड़े नेता और अंग्रेज अफसरों की मुलाकात इसी आश्रम में होती थी। बापू ने यहां भी लोगों को चरखा अभियान से जोड़ा था। आज भी आस-पास के गांवों में इसकी झलक देखने को मिलती है। आश्रम के अंदर बापू ने गौशाला का भी निर्माण कराया था। साथ ही अतिथियों को रहने के लिए अलग से कुटी का निर्माण कराया था।

बापू का स्नानागार
गांधी जी का अंतिम निवास( यहां से महात्मा गांधी नोआखली दंगे के दौरान निकल पड़े थे। 1946 में जाने के बाद वापस कभी नहीं आश्रम लौटे।
राष्ट्रपिता इसपर बैठकर करते थे कार्यालय का काम
आदि निवास में बापू लोगों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते थे। उनसे राय-मशविरा करते थे।
बापू का वजन मापनेवाला यंत्र।
आश्रम में सूत काटते बच्चे।
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