सिर्फ कोल्हापुरी चप्पल ही नहीं…इस शहर में देखने को काफी कुछ है

कोल्हापुरी चप्पल का नाम तो आपने सुना ही होगा. यहां की जूतियां और चप्पल से ही  नॉर्थ इंडिया के लोग इस शहर को जानते हैं. लेकिन, महाराष्ट्र के इस खूबसूरत शहर में आपका दिल बस सकता है. क्योंकि कोल्हापुर बेहद ही आकर्षक और नैसर्गिक सुंदरता से भरा-पूरा शहर है. की-बोर्ड पर ऊंगलियां तोड़नेवाले विवेक त्रिपाठी हाल ही में इस शहर की यात्रा कर लौटे हैं. जानिए कोल्हापुर की कहानी…उन्हीं की जुबानी   

कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर

सुकून की तलाश

 हैदराबाद में रोजाना की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच सुकून की तलाश थी, दिसंबर का महीना था. और मेरे पास कुछ छुट्टियां शेष बची हुई थीं, मैंने सोचा कहीं चलते हैं जहां शांति मिले..तो पास में ही कोल्हापुर जाने का मन बना लिया. मैंने अपनी पत्नी से कहा बैग पैक करो चलना है. एक दिन पहले ही हैदराबाद से कोल्हापुर संगीता ट्रैवल्स की बस में दो AC स्लीपर की टिकट बुक की. शाम को सात बजे बस मिली और हम निकाल पड़े.

मंदिर का बाहरी परिसर

महालक्ष्मी मंदिर का दर्शन

सुबह सूर्य की पहली किरण सोलापुर और मिरज के बीच खूबसूरत सड़क किनारे खूबसूरत पहाड़ियों पर पड़ी. आठ बजे हम कोल्हापुर पहुंचे होटल बुक किया और फिर रिफ्रेशमेंट के बाद अंबाबाई यानी महालक्ष्मी टेंपल चले गए. मंदिर पहुंचने के बाद ऐसा लगा कि दुनिया में इससे ज़्यादा रौनक कहीं और नहीं. दर्शन के बाद हमने मंदिर प्रांगण में ही प्राचीन कला की झलक देखी, यहां अनगिनत पिलर हैं मंदिर के जिसे बहुतों ने गिनने की कोशिश की. लेकिन नाकामयाब रहे.

पत्नी के साथ विवेक त्रिपाठी

क्या है मान्यताएं

यही इकलौता ऐसा मंदिर है जहां माता लक्ष्मी की मूर्ति पश्चिम मुखी है उनके सामने एक पीतल का कछुआ है, माना जाता है कि साल में दो बार माता को खिड़की से धूप की रोशनी मिलती है, तिरुमला में स्थित व्यंकटेश से यानी तिरुपति बालाजी की हर साल कोल्हापुर महालक्ष्मी का विवाह होता है. कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से धनलक्ष्मी और कामयाबी साथ-साथ आती है.

मंदिर जाने का रास्ता 

रंकाला झील की खूबसूरती

खैर, मंदिर दर्शन के बाद बाहर निकलकर हमने नाश्ते में महाराष्ट्र का मशहूर वड़ा पाव और अप्पे खाया. फिर यहां से निकल गए. मंदिर से तीन किलोमीटर दूरी पर एक चौपाटी है जिसे पंचगंगा का रंकाला झील कहते है. शाम के समय इस झील की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है. डूबते हुए सूर्य को यहां से देखना बेहद आकर्षक लगता है. झील  किनारे बैठकर सपनों की दुनिया आप बड़े ही आराम से सैर कर सकते हैं. झील के आसपास घुड़सवारी का भी लुत्फ उठा सकते हैं. हमने तो मौसम की नजाकत को देखते हुए पत्नी साथ बोटिंग का आनंद लिया. ओह..क्या लिखा जाए. .डूबते सूरज की रोशनी की परछाई झील में पानी के साथ आंखमिचौली का खेल खेलती है.

चलो उस पार चलें

किले की सैर

रंकाला झील का निर्माण 1800 के दौरान ही हुआ था. बताया जाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे बनवाया था. दो से तीन घंटे तक यहां सैर करने के बाद पास में ही कोल्हापुर के राजा का किला देखने के लिए निकल पड़े. किले के मेन गेट पर ही एक तोप सैलानियों का स्वागत करता है. हालांकि, अगर आपने राजस्थान के किले दिखे होंगे. तो यहां का किला उसके सामने कुछ नहीं है. फोर्ट घुमने के बाद होटल की ओर निकल पड़े. रात हो चुकी थी और पूरे दिन भर की यात्रा से थकान भी. लिहाजा कमरे में पहुंचते ही नींद की आगोश में खो गया.

कोल्हापुर की खूबसूरती

हैदराबाद की ओर रवानगी

अगले दिन कोल्हापुर के बाजारों की रौनक देखी आंखें ठहर गई, कोल्हापुरी चप्पलें मशहूर है ड्राई फ्रूट्स यहां सस्ते हैं नॉर्थ इंडिया और हैदराबाद बंगलौर के मुकाबले. यहां मौसम सुहावना है गर्मी ना ठंड, हॉकी फुल्की शॉपिंग के बाद हम शाम की बस से हैदराबाद वापस आ गए. अब जल्द मौका मिलते ही कहीं और के भी दर्शन करने की तमन्ना है।

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