PART4: कश्मीरी शादी में बिहारी मेहमान, दावत का उठाया लुत्फ

कश्मीर में मेहमानवाजी का दौर अभी थमा नहीं है. बारामुला और गुलमर्ग के बाद श्रीनगर लौटना है. जहां, एक दोस्त की ओर से कश्मीरी शादी देखने का न्योता मिला है. तो घुमक्कड़ी के पांचवे दिन भारती द्विवेदी श्रीनगर की ओर निकल पड़ी हैं. आगे पढ़ें…  

श्रीनगर में दोस्तों का साथ  

सड़क पर सन्नाटा
बहुत सारा प्यार और यादों को समेटे हुए हम श्रीनगर के लिए निकल पड़े. सड़क पर गाड़ियां इक्का-दुक्का ही चल रही थी. क्योंकि कश्मीर बंद था. कैब वाले ने हमें लाल चौक उतारा. अहले सुबह वहां सीआरपीएफ के जवान और हथियारों के अलावा कुछ नहीं था. हमने होटल बुक किया और पूरा दिन आराम किया क्योंकि शाम में दोस्तों के साथ कंगना के लिए निकलना था. कंगना में मेरे दोस्त की दोस्त की शादी थी और वो हमें कश्मीरी शादी दिखाना चाहते थे. हमने भी हामी भर दी थी. शाम पांच-छह बजे के आसपास हमसब कंगना के लिए रवाना हुए.  

कंगना में दुल्हन

टियर गैस का प्रभाव
श्रीनगर से बाहर निकलते वक्त अचानक से मुझे खांसी हुई, आंखों में जलन हुई. मैं कुछ समझ पाती उससे पहले ही स्नेहा भी खांसने लगी. गाड़ी में मौजूद दोस्तों ने फौरन गाड़ी का शीश ऊपर करते हुए बताया कि थोड़ी देर पहले यहां पत्थरबाजी हुई है, जिसके वजह से टियर गैस छोड़ा गया है. फिर उन्होंने कहा सोचो हमारा क्या होता है, जब कभी भी, कहीं भी हमारे घरों में टियर गैस फेंक दिया जाता है. सामने वाला ये भी नहीं देखता कि घर में बच्चे होंगे, कोई बीमार हो सकता है. उनके इस बात का हमारे पास कोई जवाब नहीं था. लेकिन दिमाग में ये जरूर चल रहा था कि पुलिस वालों की भी मजबूरी है. मतलब यहां पर हालात को आप सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट के चश्में से नहीं देख सकते हैं बल्कि बीच में एक और रंग है.  

कश्मीरी ड्रेस में मौजूद शादी में आई महिलाएं. 

लोगों ने ख्वाब देखना छोड़ दिया
कश्मीर ट्रिप के दौरान एक बात जो मुझे बहुत अच्छे से समझ आई वो ये थी कि भारत-कश्मीर के लोगों के बीच जो सबसे बड़ी खाई है वो है बातचीत ना होना. जैसे दूसरे राज्यों का हर इंसान कश्मीरियों को गलत नहीं समझता, ठीक वैसे ही हर कश्मीरी भारत को अपना दुश्मन नहीं समझते या यहां के लोगों से नफरत नहीं करते हैं. कश्मीर के लोगों से मिलकर ऐसा लगा कि वो उस प्वाइंट पर हैं, जहां एक बार सामने वाला प्यार से हाथ पकड़ ले या उनकी बात सुनने को तैयार हो जाए वो बिखर जाए. कश्मीर का दुर्भाग्य कहिए या हककीत वहां के लोगों से बात करने के बाद ये एहसास होता है कि वहां के लोगों ने ख्वाब देखने छोड़ दिए हैं. 

कश्मीर में ख्वाब मरने लगे हैं.  

कश्मीरी शादी का लुत्फ
खैर…फिर हम कंगना पहुंचे और वहां भी हमारा खासा ख्याल रखा गया. मेहमानवाजी का तरीका हर जगह एक ही था, बस हैसियत की हिसाब से चीजें बदलती नजर आईं. कश्मीरी दावत के बारे में बता दूं कि यहां पर एक बड़े से थाल में चार लोगों का खाना एक साथ आता है. चार लोग एक थाल में ही खाते हैं. सबसे पहले मेहमानों को भाता पर मटन की कोई ग्रेवी वाली डिश दी जाती है. फिर एक करके वाजवान का कई डिश परोसी जाती हैं. यहां पर दावत में साग भी परोसा जाता है लेकिन उस साग की खासियत ये हैं कि उसे भी मटन या चिकेन के सूप से तैयार किया जाता है. वहीं, यहां की शादियों में भी महिलाओं का रोल ज्यादा होता है. खासकर, शादी में शामिल हो रहीं महिलाओं को नाचते-गाते देखना काफी रोमांचित कर रहा था. शुद्ध शादी के लोकगीत भी गाए जा रहे थे. वो पल्ले तो नहीं पड़ रहा था. लेकिन, मजा काफी आ रहा था. खासकर शादियों में ट्रैडिशनल लुक भी देखने को मिला. हर किसी के पोशाक में कश्मीरियत झलक रही थी. 

कश्मीर में शादी का लुत्फ उठाती भारती द्विवेदी.

रात का श्रीनगर
दो-तीन घंटे खातिरदारी का लुफ्त उठाने के बाद हम श्रीनगर वापस लौटे. श्रीनगर वापस लौटने के दौरान 10-11 बजे चुके थे. शाम में पांच बजे के बाद नहीं निकलने वाली सारी हिदायतें बेमानी लग रही थी. कश्मीर में हमने हर दिन रात के 11 बजे तक ट्रैवल किया था तो अब सेफ्टी को लेकर मिलनेवाली नसीहतों पर शक सा होने लगा था. शहर पूरा बंद पड़ा था. कई दुकानों के शटर पर ‘इंडिया गो बैक’, ‘इंडियन डॉग्स’ जैसे स्लोगन लिखे हुए थे, जिसे काले रंग से मिटाने की कोशिश की गई थी. डाउन टाउन के आसपास एक जगह ढेर सारे पत्थर जमा करके रख गए थे. जैसे कि जंग की तैयारी हो. इन सारी चीजों के देखकर भी मुझे डर नहीं लग रहा था क्योंकि फैज़ और अब्दुल्ला साथ थे. वो अलग बात थी कि ये दोनों खुद डरे हुए थे. हमारी सेफ्टी को लेकर. 

शादी में मेहमानवाजी.

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वो लड़की…जो लाल चौक पर झंडा फहराने नहीं, केक काटने गईं थी

 PART2: कश्मीर की मेहमानवाजी कभी भुलाई नहीं जा सकती  

PART3: कश्मीर में इस्लाम के नाम पर हर चीज जस्टिफाई क्यों ? 

DISCLAIMER/नोट: यायावरी की पूरी स्टोरी पत्रकार #BhartiDwivedi के फेसबुक से लेकर बनाई गई है. फोटो और स्टोरी लेने से पहले उनकी इजाजत ली गई है. 

अगली कड़ी में पढ़ें पहलगाम और अनंतनाग की सैर और मशहूर मार्तण्ड सूर्य मंदिर का दर्शन 

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