स्पिति यात्रा का आज चौथा दिन है। किन्नौर में ही कल्पा जाने का लक्ष्य है। यह छोटा से बेहद खूबसूरत गांव है। यहां की सड़कों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल होती है। एक प्वाइंट पर एक तरफ ऐसी क्लिफ है जिसके सामने हजारों फीट गहरी खाई दिखती है। दूसरी तरफ बिल्कुल पतली सड़क है। इसके ऊपर लगता है चट्टानें खुद छाता लगाकर खड़ी है।

उफनती सतलुज के किनारे-किनारे चलना
सतलुज नदी के किनारे-किनारे NH 5 से होकर गुजरते हैं। सतलुज की धारा तेज होती है। शानदार लैंडस्केप आपको नजर आते हैं। इस बीच गुजरना आपकी यात्रा को रोमांचक बनाता है। इस हाइवे पर ही करचम-वांग्टू जगह पड़ती है। यहां पर सतलुज नदी की तेज रफ्तार को बांधा गया है। जानकारी लेने पर पता चला कि करचम-वांग्टू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है। इसे एनर्जी सेक्टर की जेएसडब्लयू(JSW) कंपनी चलाती है।

लैंडस्केप में बदलाव
करचम-वांग्टू डैम से टपरी, किलबा, करचम, राली जैसे छोटे-छोटे कस्बों को पार करते हुए रिकांग पिओ पहुंचता हूं। रिकांग पिओ पहुंचने से पहले ही लैंडस्केप में बदलाव दिखता है। बंजर पहाड़ों की जगह पर अब हरियाली से भरे पहाड़ नजर आने लगते हैं। बर्फ से ढकी चोटियां दिखने लगती है। गांव बाजार में तब्दील होता है। दरअसल, रिकांग पियो किन्नौर जिले का मुख्यालय है। सभी प्रशासनिक कार्यालय यहीं पर हैं। इस वजह से यहां पर भीड़ भी ज्यादा है। हालांकि, कल्पा की ओर जाने वाले लोग रिकांग पियो भी रूक सकते हैं। यहां कई होम स्टे और होटल मिल जाएंगे। इस जगह से कल्पा की दूरी मात्र तीन किमी है। यही सड़क आगे पांगी गांव की ओर चली जाती है। रिकांग पियो से जैसे ही आप आगे बढ़ेंगे चढ़ाई खड़ी हो जाती है। रास्ता पूरी तरह से खतरनाक। इस रास्ते की तस्वीरें और वीडियो सबसे ज्यादा सोशल मीडिया वायरल होती है।

किन्नौर कैलाश का दर्शन भी होता है
जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं। किन्नौर कैलाश की पर्वत श्रेणियां आपको नजर आती है। बेहद खूबसूरत लैंडस्केप नजर आता है। बर्फ की चोटियां, चारों ओर बादल। मन-मिजाज पूरी तरह से खुश हो जाता है। इस रास्ते पर कई प्वाइंट आपको मिलते हैं जहां से किन्नौर कैलाश का दर्शन होता है। वह शिलाखंड नजर आता है, जो महादेव का प्रतीक है।
पंच केदार में से एक है किन्नौर कैलाश। हालांकि, वहां तक पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ती है। नीचे गांव से ट्रैकिंग शुरू होती है। इसका पहले से रजिस्ट्रेशन होता है। पर्यटन विभाग की ओर से दिए गए तारीख के अंदर ही यात्रा की जाती है।

कल्पा सुसाइड प्वाइंट सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल
दूर से ही महादेव का दर्शन कर हमलोग निकल पड़े कल्पा सुसाइड प्वाइंट के लिए। इस जगह का नाम बदलकर अब रोघी क्लिफ बोला जाने लगा है। इस जगह पर किसी ने सुसाइड नहीं की है। पर्यटकों के बीच यह सुसाइड प्वाइंट के तौर पर जाना जाता है। यहां पर हिमाचल रोडवेज की बस और किसी शख्स की तस्वीर काफी सोशल मीडिया पर नजर आती है। लेकिन, अब इस प्वाइंट पर ग्रिल लगा दिया गया है। साथ ही बोर्ड लगा दिया गया है। यहां पर जमकर फोटोबाजी होती है। बाइक रायडर्स की लिस्ट में यह जगह पसंदीदा होती है।

1960 तक इस रास्ते से तिब्बत जाते थे लोग
पुराने जमाने में इस रास्ते से लोग तिब्बत तक जाते थे। वहां से भी व्यापारी हिमाचल के इस इलाके में आते थे। हालांकि, 1962 के युद्ध के बाद उस रास्ते को बंद कर दिया गया। अब आने-जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इसके अल्टरनेटिव यह रास्ता बना, जिस पर सफर करते हुए हमलोग कल्पा तक पहुंचे हैं। यह आगे पांगी गांव तक चला जाता है।

हर किसी को कल्पा जाना चाहिए हर किसी को कल्पा जाना चाहिए
कल्पा बेहद खूबसूरत गांव है। यहां हिल स्टेशन वाली भरपूर भीड़ नहीं है। अगर आप सुकून से कुछ दिन बिताना चाहते हैं तो यहां आ सकते हैं। फिलहाल, हमलोग निकल पड़े हैं अब भारत के अंतिम गांव चितकुल की ओर….
आगे की यात्रा के लिए travellinglover.in पर बने रहिए। ट्रैवलिंगलवर के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों का सैर करते रहिए। शब्दों और तस्वीरों से मन ऊब जाए तो वीडियो देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल की ओर भी रूख कर सकते हैं।
