PART11: पहला प्यार से कम रोमांचक नहीं होता.. पहली बार बर्फबारी देखना

पिछले पार्ट में आपने मलाना गांव की सच्चाई के बारे में पढ़ा था. गूगल सर्च से निकली कई जानकारियां यहां पहुंचकर गलत साबित हो गई थी. अब, आपको रूबरू कराते हैं मलाना की बर्फबारी से… 

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बर्फबारी से पहले का मलाना

बर्फ की बिछी चादर

मलाना गेस्ट हाउस करीब 2 बजे दोपहर तक पहुंच गए थे. कमरे में कुछ देर तक सभी ने आराम किया. बर्फबारी शुरू हो चुकी थी. पहली बार मैं इसका लुत्फ उठा रहा था. इसका एहसास आपको किसी तीसरी दुनिया की सैर कराने लगता है. पहाड़ों की ऊंची चोटियों से टकराते हुए आसमान से गिरते बर्फ के फव्वारे. आकाश को स्पर्श करती पेड़ों के पत्तों से सरकते हुए गिरते बर्फ. टहनियों से लटकते हुए बर्फ के गोले. इसे सामने देखकर दिल में अलग तरह का रोमांच पैदा होने लगा. इस एहसास को शब्दों में पिरोना काफी मुश्किल है. लेकिन, इतना तो जरूर कह सकता हूं कि पहले प्रेम में जो रोमांच होता है. कुछ उसी तरह का एहसास प्रकृति के इस रूप को देखकर महसूस कर सकते हैं.  इस बीच गेस्ट हाउस के ऑनर ललित हमारे पास आए. ललित जी मस्त इंसान हैं. स्वागत में कोई कमी नहीं रखते हैं. उनसे पूछा कहीं घुमने जाया जा सकता है. इसका जवाब था- घुमने के लिए तो यहां के ऊंची-ऊंची पहाड़ियां हैं. गांव में देखने के लिए कुछ भी नहीं है. आप पूरा गांव देखते हुए यहां तक पहुंचे हैं. इसके बाद गेस्ट हाउस से बाहर का नजारा हमलोग देखने लगे. अब तक गांव के सभी घरों पर बर्फ की चादर बिछने लगी थी. सर उठाने पर पहाड़ियों की चोटी बर्फ से लदी थी. लग रहा था किसी ने सफेद चादर डाल दिया हो.

मलाना गांव के सभी घरों पर बर्फ की चादर बिछने लगी थी. सर उठाने पर पहाड़ियों की चोटी बर्फ से लदी थी. लग रहा था किसी ने सफेद चादर डाल दिया हो.
मलाना की बर्फबारी

पहाड़ में पराठा

1 घंटे बाद  गरम-गरम पराठे हमारे कमरे में आ गया. साथ में नूडल्स और सब्जी भी. अपनी थकान को दूर करने के बाद हमलोगों ने जमकर खाना खाया. खाने के लिए नॉर्थ इंडियन डिश यहां होटलकर्मी उपलब्ध करा देते हैं. गेस्ट हाउस में इसकी व्यवस्था होती है. बिजली भी कमरे में थी. म्यूजिक के बीच हमलोग बर्फबारी को देख रहे थे. गांव के बच्चे लकड़ी की एक गाड़ी से बर्फ पर फिसल रहे थे. बर्फबारी के बीच भी कई ग्रामीण लकड़ी काटकर घर की ओर लौटते दिखें. शाम को गेस्ट हाउस के पास लकड़ी जलाकर म्यूजिक का प्रोग्राम रखा गया. ललीत ने बताया कि बर्फबारी रूकने पर ही ऐसा संभव है.

मलाना गांव में बर्फबारी के बीच भी कई ग्रामीण लकड़ी काटकर घर की ओर लौटते दिखें. शाम को गेस्ट हाउस के पास लकड़ी जलाकर म्यूजिक का प्रोग्राम रखा गया. ललीत ने बताया कि बर्फबारी रूकने पर ही ऐसा संभव है.
काम तो करना ही है

मलाना क्रीम का लुत्फ

गेस्ट हाउस से निकलकर मैं बाहर टहलने लगा. गेस्ट हाउस के ऑनर ललित की पत्नी ने बताया कि वो इसी गांव की रहनेवाली है. यहां की भाषा के साथ-साथ हिंदी भी जानती है. अंग्रेजी भी समझ लेती है. उनसे काफी देर तक बातचीत होती रही. किचन में ही उनके साथ बात कर रहा था. ठंड बढ़ रही थी. बर्फबारी भी तेज हो गई थी. यहां हीटर जल रहा था. उसके चारों ओर तीन लोग बैठकर बातें करने में लगे थे. अब तक शाम हो गई थी. अंधेरे की शुरुआत हो गई थी. लेकिन, आसमान से बर्फ लगातार गिर रहा था. कमरे में पहुंचकर साथियों से बात करने लगा. मलाना क्रीम भी सभी जला  चुके थे. उसका लुत्फ उठाया जा रहा था.

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कमरे की एक झलक

लौटने की चिंता

मलाना की खूबसूरती पर बातचीत चल रही थी. एक बार और  चाय पीने की इच्छा हुई. रात 8 बजे के करीब हमलोग चाय से गर्माहट लाने की कोशिश की. यहां चाय भी दूध की तरह दिया जाता है. ग्लास में भरकर. कमरे से बाहर निकलने पर घुप अंधेरा दिख रहा था. घरों के बाहर बिजली के बल्ब चमक रहे थे. इस गांव की खूबसूरती रात में और अधिक बढ़ गई थी. उधर, बर्फबारी थमने का नाम नहीं ले रही थी. वापस लौटने का सोचकर हमलोग की चिंता बढ़ गई. अब, उस ड्राइवर की बात याद आ रही थी जिसने मलाना की कहानी बताई थी. उसने साफ कह दिया था कि बर्फबारी होने पर जरी तक कोई भी गाड़ी नहीं मिलती है. ऑफिस से छुट्टी भी 4 दिन की ही मिली थी. साथ में आए साथियों में दो घर से झूठ बोलकर आए थे. अच्छी बात ये थी कि लाइट होने की वजह से सभी का मोबाइल चार्ज था.

मलाना की खूबसूरती...
बर्फबारी की खूबसूरती

मोबाइल की रोशनी

हर कोई अपने शुभचिंतकों से बात करने में जुटे थे. रात के 9 बजे तक हमलोगों का डिनर आ गया. खाना बेहद ही टेस्टी था. सारी चिंता छोड़कर हमलोग खाने में जुट गए. इसके बाद कमरे से बहर निकला तो कुछ भी दिख नहीं रहा था. क्योंकि अंधेरी रात वो भी मलाना की. आसमान साफ दिख रहा था. लेकिन, बर्फबारी जारी थी. गांव के लोग अब तक सो चुके थे. इनके लिए तो 9 बजे ही काफी रात होती है. ठंड काफी बढ़ गई थी. इस बीच ललीत पर नजर पड़ी. मैंने पूछा क्या अगले दिन निकल पाऊंगा. इसका जवाब था बर्फबारी रूकने पर निकल सकते हैं. अब, सोने के अलावा कोई आप्शन नहीं था. इस बीच ही लाइट चली गई. अचानक लगा, सबकुछ खत्म हो गया. बर्फबारी के साथ-साथ तेज हवा चल रही थी. चारों ओर सन्नाटा फैला था. सभी लोग मोबाइल की लाइट की मदद से बिस्तर पर लेट गए…

मलाना गांव के लोग. malana villagers
बर्फबारी से पहले का नजारा

चलो फिर सोया जाए

भारी-भरकम रजाई को पल भर में ओढ़ लिया गया. सभी लोगों ने एक ही बेड पर सोने का निर्णय लिया. बातचीत करते करते नींद लग गई. रात करीब 1 बजे नींद खुली तो कमरे से बाहर निकलने का साहस जुटाया. बर्फबारी बंद नहीं हुई थी. ठंड की वजह से मैं तुरंत  बेड पर चला गया. सोचा, जो होगा सुबह में देखा जाएगा. इतना तो तय हो गया था कि आगे चलना मुश्किल हो गया है. लाइट आ गई थी. मोबाइल  को चार्च में लगा दिया. इस गांव में सिर्फ एयरटेल का नेटवर्क है. इससे बातचीत हो रही थी. इंटरनेट भी चल रहा था. खैर, अगले दिन के बारे में सोचते हुए फिर से  सो गया…

मलाना गांव के आशियाने

अगली कड़ी में पढ़ें बर्फबारी के बीच मलाना से निकलने का जोखिम भरा फैसला

मलाना यात्रा की पूरी सीरिज यहां पढ़ें

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