द्वारिकाधीश: समंदर में बोट से कुलांचे मारने का आनंद ही कुछ और है

अरब सागर के किनारे बसे गुजरात राज्य की अलग ही खूबसूरती है. इसकी संस्कृति और खान-पान के लोग दिवाने हैं. पेशे से पत्रकार और घुमक्कड़ी का शौक रखनेवाले राहुल देव आपको गुजरात की सैर कराएंगे. चार धामों में शामिल द्वारकाधीश से लेकर कई मशहूर जगहों से आपको रूबरू कराएंगे.

पत्नी और बेटे को घुमक्कड़ी कराते पत्रकार राहुल देव.


2 हजार साल पुराना इतिहास

सनातन धर्म में चार धामों का काफी महत्व है. कहा जाता है कि देश के सभी धामों का दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. देश के पश्चिमी भाग में अरब सागर के किनारे द्वारिकाधीश है. इसे भगवान कृष्ण की नगरी भी कहते हैं. पुरात्तत्व विभाग के मुताबिक द्वारिकाधीश मंदिर 2 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है. इस मंदिर की इमारत 5 मंजिला है और इसकी ऊंचाई करीब 235 मीटर है. 72 स्तंभों पर मंदिर टिकी हुई है. मान्यताओं के मुताबिक यहां से ही भगवान कृष्ण ने राज्य चलाया था.

द्वारिका मंदिर जाने का रास्ता.


जानें द्वारिका का अर्थ

पूरी फैमिली के साथ द्वारिका पहुंचे राहुल देव बताते हैं कि यहां पहुंकर सुखद एहसास होता है. एक तरफ अरब सागर की लहरें तो दूसरी तरफ मंदिर की खूबसूरती पल भर के लिए प्रकृति के बारे में सोचने को विवश कर देता है. इस शहर का नाम संस्कृत के द्वार से लिया गया है. जिसका अर्थ होता है दरवाजा. यह भारत के सात प्राचीन शहरों में से एक है, जो कि द्वारिकाधीश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।


भगवान ने किया था वध

श्री कृष्ण की सत्तारूढ़ जगह के अलावा, द्वारिका वह जगह है जहां भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक राक्षस का वध किया था. स्थानीय लोगों के मुताबिक इस शहर ने भगवान श्रीकृष्ण को पृथ्वी से बाहर जाने के बाद अरबी समुद्र में छः बार डुबो दिया है और वर्तमान द्वारका 7वां शहर है. जिसको पुराने द्वारिका के पास पुनः स्थापित किया गया था।

समंदर का लुत्फ उठाते यात्री.

ओखा का सुहाना सफर

द्वारका से ओखा का सफर काफी सुहाना होता है. 35 किमी की दूरी पर ओखा में भेट-द्वारका नाम की जगह है. इसका अर्थ मुलाकात होता है. कहा जाता है कि इसी जगह पर ही श्रीकृष्ण ने सुदामा से मुलाकात की थी. अपने दोस्त से मिलकर दोस्ती की मिसाल कायम की थी. इस मंदिर में कृष्ण और सुदामा की प्रतिमाओं की पूजा होती है और मान्यता है कि द्वारका यात्रा का पूरा फल तभी मिलता है जब आप भेट द्वारका की यात्रा करते हैं।

परिवार के साथ पत्रकार राहुल देव.


ऐसे पहुंचे भेट-द्वारका

भेट-द्वारका बोट के सहारा लोग पहुंचते हैं. समंदर में बोट से आगे बढ़ना कई बार भयभीत भी करता है. लहरों के बीच जब आप बोट में चलते हैं तो अलग तरह का आनंद की प्राप्ति होती है. चेहरे पर थकान गायब हो जाता है और हर किसी का चेहरा दमक उठता है. करीब 10 मिनट समुद्र में यात्रा कर आप भेंट द्वारका पहुंच सकते है. यहां मंदिर एक छोटा टापू पर बना है। यहां के लोग बड़ी संख्या में मछली के व्यापार से जुड़े हुए हैं.

द्वारिका मंदिर के पास घुमक्कड़ परिवार.


ऐसे पहुंचे द्वारका

द्वारका शहर की कनेक्टिविटी काफी अच्छी है. आप सुविधानुसार यहां आ सकते हैं. अगर फ्लाइट से आना चाहें तो सबसे नजदीक का एयरपोर्ट जामनगर है. इसकी दूरी द्वारका से महज 47 किमी हैॉ इसके अलावा पोरबंदर एयरपोर्ट से भई द्वारका पहुंचा जा सकता है.

शहर की कहानी.

वहीं, ट्रेन से आने पर आप सीधा द्वारका रेलवे स्टेशन आ सकते हैं. देश के विभिन्न शहरों से यहां हर दिन ट्रेन आती है. ट्रेन से आनेवाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर आना ज्यादा बेहतर हो सकता है. क्योंकि रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी महज 1 किमी ही है.

समंदर में श्रद्धालु.

वहीं, सड़क मार्ग से भी लोग द्वारका घूमने आ सकते हैं. जामनगर जिले के इस शहर तक काफी अच्छी सड़क बनी हुई है. आप खुद की गाड़ी से भी यहां तक आ सकते हैं. इसके अलावा कई ट्रैवेल एजेंसी भी अपनी गाड़ी मुहैया कराती है. इसके अलावा स्टेट सर्विस की भी बस आपको द्वारका तक मिलेगी.

अभी जाइए नहीं..सैर करते रहिए राहुल देव के साथ गुजरात के कई शहरों की…

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1 COMMENT

  1. घूमने का शौक बहुत पुराना है सर का…मेरे हिसाब से हिन्दूस्तान के सभी बड़े शहर जा चुके हैं सर…

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