12 ज्योतिर्लिंग में इनका है पहला स्थान, पहुंचकर दिल को सुकुन मिलेगा

तो दोस्तों आपको पत्रकार राहुल देव गुजरात की सैर करा रहे हैं. पिछले पोस्ट में आपने द्वारिकाधीश का दर्शन किया. इस बार देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल सोमनाथ लेकर चल रहे हैं. सोमनाथ महज एक मंदिर नहीं. बल्कि, भारतीय इतिहास की स्वंय कहानी बताती है. 17 बार इसे खत्म करने की कोशिश की गई. लेकिन, आज भी समंदर की लहरें इससे टकराकर वापस लौटती है.

सोमनाथ से समंदर
सोमनाथ मंदिर के पास से समंदर की खूबसूरती गजब की होती है. मंदिर के पास बैठकर शांत होकर लहरों को देखने रहने से शरीर में उर्जा का संचार होता है. लगता है पूरी जिंदगी साथ में चल रही हो. लहरों का आना-जाना. कभी तूफान की तरह उठना तो कभी शांत हो जाना. कुछ ऐसा ही तो जीवन में होता है. जिंदगी में भी ऐसे ही उतार-चढ़ाव आते हैं. लेकिन, समंदर की तरह अडिग रहनेवाला इंसान ही जीवन का लुत्फ उठा पाता है. 

समंदर किनारे सोमनाथ मंदिर

परिवार है तो भी टेंशन नहीं
यायावरी का यही तो लुत्फ है. इसमें हर जगह की अपनी कहानी होती है. घुमक्कड़ हर दिन नए अनुभव से रूबरू होता है. वो भी घुमक्कड़ी परिवार के साथ हो तो क्या कहने. जिसमें आपको गुजरात की सैर करा रहे राहुल देव उस्ताद हैं. कई लोग घुमना तो चाहते हैं. लेकिन, हर वक्त परिवार में बंध जाने का रोना-रोते हैं. वहीं, देव साहब हर जगह परिवार के साथ निकल पड़ते हैं. तो चलिए अब सोमनाथ की आगे की कहानी बताई जाए.

परिवार के साथ घुमक्कड़ी

10 टन का है कलश
लोक मान्यताओं के मुताबिक सोमनाथ मंदिर का स्थान 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला है. ऋग्वेद के अनुसार सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने किया था. इस मंदिर को तीन भागों में बांटा जा सकता है. इसका शिखर 150 फुट है. जबकि, ध्वजा 27 फुट. स्थानीय लोगों का कहना है कि शिखर पर मौजूद कलश का भार 10 टन के करीब है. लोककथाओं की मानें तो भगवान श्रीकृष्ण ने यहां देहत्याग किया था. हालांकि, कालांतर में कई बार इस मंदिर को तोड़ा गया. इतिहास बताती है कि 17 बार इस मंदिर पर बाहरी आक्रमण हुआ. मंदिर में तोड़फोड़ की गई. लुटेरे सोने-जेवरात लूट कर ले गए.

सोमनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़

लौह पुरूष ने कराया था पुनर्निर्माण
आजादी के बाद लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था. इसको फिर से आस्था का केंद्र बनाने में देश के पहले गृह मंत्री का अहम योगदान रहा है. सालों बाद पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया. जब आप सोमनाथ के प्रागंण में खड़े होकर समुद्र की लहरों को देखते है तो आपको ऐसा अनुभव होगा कि समुद्र इस मंदिर की कहानी कह रहा हो कि मैं ही इस मंदिर के विध्वंश और निर्माण का गवाह हूं.

अब  सेल्फी तो बनती है

ये देखना नहीं भूलें
राहुल देव बताते हैं कि जब भी सोमनाथ पहुंचे तो यहां शाम जरूर गुजारें. मंदिर कैंपस में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है. इसको देखे बिना सोमनाथ की घुमक्कड़ी अधूरी कही जा सकती है. बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन जब अपनी आवाज में सोमनाथ मंदिर की कहानी बताते हैं तो कुछ देर के लिए लोग स्तब्ध हो जाते हैं. वो कहीं खो जाते हैं. लगता है कोई आपके घर की बात कर रहा है. इस शो को देखकर और सुनकर आपको एक सुखद अनुभुति होगी। 

लेजर शो में सोमनाथ मंदिर की खूबसूरती

हर सुविधा का रखा जाता है ध्यान
मंदिर के बारे में आपको अगर किसी भी तरह की जानकारी लेनी हो तो ध्रुब जोशी से बात कर सकते हैं. ये यहां के पीआरओ हैं. काफी सौम्य और शांत स्वभाव के ध्रुब जी तीर्थयात्रियों की हर सुविधा का ख्याल रखते हैं. सोशल मीडिया के जरिए भी वो एक्टिव रहते हैं. यहां होने वाले आरती इतनी भव्य होती है कि आप शांत और भाव-विहोर हो जाएंगे. इसका लाइव व्यवस्था भी कराया जाता है.

सोमनाथ मंदिर के PRO ध्रुब जोशी

कैसे पहुंचें? 

वायु मार्ग– सोमनाथ से 55 किलोमीटर स्थित केशोड नामक स्थान से सीधे मुंबई के लिए वायुसेवा है. केशोड और सोमनाथ के बीच बस व टैक्सी सेवा भी है.
रेल मार्ग- सोमनाथ के सबसे समीप वेरावल रेलवे स्टेशन है. जो वहां से मात्र सात किलोमीटर दूरी पर स्थित है. यहा. से अहमदाबाद व गुजरात के अन्य स्थानों का सीधा संपर्क है.
सड़क परिवहन– सोमनाथ वेरावल से 7 किलोमीटर, मुंबई 889 किलोमीटर, अहमदाबाद 400 किलोमीटर, भावनगर 266 किलोमीटर, जूनागढ़ 85 और पोरबंदर से 122 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं. पूरे राज्य में इस स्थान के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

सोमनाथ रेलवे स्टेशन

कहां ठहरें
विश्रामशाला- इस स्थान पर तीर्थयात्रियों के लिए गेस्ट हाउस, विश्रामशाला व धर्मशाला की व्यवस्था की गई है. आप अपने बजट के अनुसार बुकिंग करा सकते हैं. साधारण व किफायती सेवाएं भी उपलब्ध है. वेरावल में भी रुकने की व्यवस्था है.

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अभी जाइए नहीं..सैर करते रहिए राहुल देव के साथ गुजरात के कई लोकेशन अभी बाकी है…

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