अब तक आपने पढ़ा कि दिल्ली से मलाना के लिए रवानगी हो चुकी है. मैं पूरी रात सफर करके शिमला पहुंचा हूं. इसके बाद अपने सहयोगी योगी जी के घर पर आ गया हूं
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योगी जी के घर पहुंचते ही राहत मिली। कुछ देर तक आराम करने के बाद कमरे से बाहर निकला। बाहर का नजारा देखकर मिजाज खुश हो गया। चारो ओर देवदार के बड़े बडे़ पेड़। पहाड़ियों के बीच बने घर। किसी होटल में ठहरने पर इतना मजा नहीं आता। कुछ देर तक आराम करने के बाद शिमला घूमने के लिए निकल पड़ा। मेरे हजारों सवालों का जवाब एक-एक कर योगी जी दे रहे थे। पहाड़ी यानी उनके घर से उतरकर सड़क पर आ गए।

शिमला जाएं तो इन्हें भी जरूर देखें
उन्होंने बताया कि शिमला घूमने का मजा पैदल ही है। अक्सर, टूरिस्ट शिमला के मशहूर जगहों को ही देखने जाते हैं। लेकिन, मुझे सचिवालय,सीएम हाउस, हाईकोर्ट समेत कई सरकारी संस्थानों को देखने का मौका मिला। सीएम वीरभद्र सिंह का आवास देखकर हंसी आ रही थी। अभी, तक मैंने सीएम हाउस के आस-पास सिक्युरिटी की फौज देखी थी। काफी बड़े एरिया में फैला सीएम हाउस देखा था। लेकिन, हिमाचल प्रदेश का सीएम हाउस बिल्कुल अलग है। जिस सड़क पर सचिवालय से लेकर सीएम हाउस है। उसे छोटा शिमला कहा जाता है।

शिमला की पहचान मॉल रोड
यही रोड आगे जाकर मॉल रोड से मिलती है। मॉल रोड बोले तो शिमला की पहचान। सीरियल से लेकर फिल्मों में मॉल रोड को दिखाया जाता है। यहां सबसे मजेदार लगता है कुछ ही देर में मोहल्ले का नाम बदल जाना। पहाड़ी पर बनी सड़क के एक तरफ मॉल रोड तो दूसरी तरफ कोई और। थोड़ी दूरी तय करने पर ही यहां नाम बदलते हैं। खैर, दूर से मुझे एक घड़ी दिखाई दी। इस घड़ी को देखकर मैं काफी खुश हो गया था। दरअसल, अब तक फिल्मों में ही इसे देख पाया था। यह घड़ी काफी पुरानी गिरजाघर में टंगी है। सामने घूमनेवालों की भीड़ लगी हुई है। बच्चे घोड़े की सवारी कर रहे हैं। कई कपल एक-दूसरे के हाथों में हाथ डालकर शिमला की खूबसूरती को निहार रहे हैं। मॉल रोड में बना गिरजाघर काफी पुराना है। यह काफी ऊंचाई पर स्थित है। जैसे-जैसे शाम हो रही थी। यहां भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। आसमान का रंग भी पल भर में बदल रहा था। गिरजाघर के पास ही एक नैशनल लाइब्रेरी है। इस लाइब्रेरी में केवल यहां के सदस्य ही जा सकते हैं। मॉल रोड के चारों ओर मार्केट है। गिरजाघर के करीब 100 मीटर पहले एक चौराहा है।

पटियाला महाराज ने यहां से अंग्रेजन को भगाया था
योगी जी ने बताया कि इस चौराहे के पास से ही पटियाला महाराज ने ब्रिटिश अफसर की एक बेटी को भगा ले गए थे। इसके बाद अंग्रेजों ने उनकी एंट्री को शिमला में बंद कर दी थी। दरअसल, महाराज ने चैलेंज किया था कि अपनी प्रेमिका को यहां स उठा कर ले जाएंगे। चलिए, मैं तो कोई और ही कहानी बताने लगा। मॉल रोड पर एक तरफ हिमाचली ड्रेस पहनकर लोग फोटो खींचाते हैं। इस जगह से शिमला की खूबसूरती गजब की होती है। नीचे हजारों फीट गहरी खाइयां दिखती है। लगता है, सभी पहाड़ियां एक-दूसरे से हाथ मिला रही है। डूबता हुआ सूरज अपनी किरणों से पहाड़ियों के बीज गजब का छटा बिखेरता है। मैं जनवरी के पहले सप्ताह में शिमला पहुंचा था। बर्फबारी देखना चाहता था। लेकिन, बर्फ कहीं दिख नहीं रही थी। एक तरह कहा जाए तो शिमला का सबसे लोकप्रिय प्लेस मॉल रोड ही है। जैसे-जैसे सूरज ढल रहा था। यहां की खूबसूरती बढ़ती जा रही थी। आकाश में बादलों को मंडराते देख लोग खुश नजर आते थे।

मॉल रोड की खूबसूरती
शाम होते ही मॉल रोड पर काफी भीड़ बढ़ गई। घोड़े की सवारी करते बच्चे, हाथों में हाथ डाल सैर करते प्रेमी युगल , किनारे बेंच पर बैठे बुजुर्ग-दंपत्ति, हिमाचली ड्रेस पहनकर फोटों लेने के लिए पोज देते लोगों को देखकर ही आपका मन-मिजाज खुश हो जाएगा। मॉल रोड सफाई के मामले में भी फर्स्ट क्लास है। इतनी भीड़ होने के बावजूद सड़क पर कहीं गंदगी नहीं दिखती। आप कह सकते हैं कि सूई भी गिरने पर यहां दिख जाएगी। यहां की एक और खासियत है टूरिस्टों को लुभानेवाली मार्केट। मॉल रोड चौराहे से नीचे उतरते ही मार्केट दिखने लगता है। यहां कई पुराने होटल और आपके मनपसंदीदा खाने वाले स्टॉल दिखेंगे। गर्म कपड़ों के लिए भी दुकानों की लंबी लाइन दिखती है। हालांकि, हर टूरिस्ट प्लेस की तरह यहां भी खरीदारी महंगी पड़ सकती है। लेकिन, मार्केटिंग के शौकिनों के लिए तो ये बेस्ट प्लेस हो सकता है।

इसलिए लौट पड़े घर की ओर
मॉल रोड के एक तरफ मार्केट है, तो दूसरी तरफ लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगी हुई है। इन कुर्सियों पर और इसके पीछे दीवारों पर कई जानकारियां लिखी हुई है। टूरिस्ट के लिए मॉल रोड के पास भी कई होटल हैं। लेकिन, यहां महंगाई ज्यादा है। यहां से थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर सस्ते दर में होटल मिल जाते हैं। मॉल रोड की एक और खासियत है कि यहां पर आप गाड़ियों से नहीं घूम सकते हैं। बाइक और दूसरी गाड़ियों के लिए नो एंट्री है। शिमला घूमने का लुत्फ तो पैदल ही आता है। खैर, कई घंटो तक मॉल रोड घूमने के बाद थक गए थे। अब, पैर भी जवाब देने लगा था। इसलिए, मित्र योगी जी के साथ वापस घर लिए रवाना हो गया।
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