अब तक आपने पढ़ा कुफरी से लौटने के बाद जाखू मंदिर तक की यात्रा की रोमांचक कहानी. अब पढिए मलाना गांव की ओर सफर की शुरुआत कैसी रही..

तो दोस्तों अब मलाना की ओर निकल पड़ा था मैं. सबसे पहले शिमला बस स्टैंड पहुंचा. इसके बाद मनाली जाने वाली बस पकड़ ली. रास्ते में ही भुंतर नाम की जगह है.यहां उतरना था. मनाली का नजदीकी एअरपोर्ट भी यहां है. बस ड्राइवर ने बताया कि सुबह 4 बजे तक भुंतर पहुंचेंगे. फिर से शिमला की तरह नई जगह पर इतनी सुबह में उतरना था. अच्छा ये हुआ कि शिमला में पूरी बस भर गई थी. किसी को कसोल जाना था, किसी को मणिकर्णम तो कोई मनाली जा रहा था. सभी लोग ग्रुपिंग में ट्रैवल कर रहे थे. अकेले सफर सफर पर निकलनेवाला सिर्फ मैं ही था. तभी एक लड़के ने पूछा आप मलाना जाएंगे क्या. रिप्लाई हां में सुनते ही वो खुश हो गया. सवाल पर सवाल दागने लगा. कैसा रास्ता है, कैसे पहुंचेंगे, चरस ला सकते हैं या नहीं. तमाम सवाल लगातार कर रहा था. इस बीच एक लड़के ने मलाना को लेकर डराना शुरू कर दिया. तमाम तरह की कहानियां बताने लगा. बहुत खतरनाक रास्ता है. बर्फबारी होने पर फंस जाएगा. इसके बावजूद मैं मलाना जाने के लिए तैयार था. मैंने काफी जानकारी भी हासिल कर ली थी. खैर, बस गंतव्य की ओर चल पड़ी थी. पहाड़ियों पर रात में गाड़ी चलाना सबके बस की बात नहीं है. घुमावदार रास्तों पर ब्रेक लगते ही लगता है कि जान निकल गई. इसकी एक वजह ये भी थी कि पहाड़ी रास्तों पर चलने का ज्यादा प्रैक्टिस नहीं था. बस अपनी रफ्तार से चली जा रही थी. हमलोग तोस,मलाना,कसोल,मणिकर्णम पर चर्चा कर रहे थे. इस दौरान एक-एक कर सभी को नींद आने लगी थी. मैं भी नींद के आगोश में कब चला गया पता ही नहीं चला. अचानक कंडक्टर की आवाज़ से नींद खुली. सुबह का 4 हज रहे थे. बस भुंतर पहुंच चुकी थी. करीब 6 लोग यहां उतरे थे. रात के सन्नाटा को चीरती हवा से अजीब डर लग रहा था. सर्द हवा शरीर के एक-एक अंग को झकझोर रही थी. खैर, सामान उतारकर सभी सड़क किनारे खड़े हो गए.

कुछ देर बाद एक गाड़ीवाला आकर अपना बिजनेस शुरू कर दिया. उसकी बातें में इतना मीठापन था कि बताया नहीं जा सकता. मलाना के लिए वो सबसे ज्यादा पैरों की डिमांड कर रहा था. साथ ही वहां जाने से मना भी कर रहा था. बर्फबारी हो जाएगी, भूस्खलन हो जाएगा, फंस जाओगे इन बातों को बताकर डराने की भरपूर कोशिश कर रहा था. हालांकि, इसमें बहुत कुछ सच्चाई भी थी. गर्मी के मौसम में मलाना जाना ज्यादा बेहतर माना जाता है.ड्राइवर की बातों को सुनकर साथ में 3 युवाओं को डर लगने लगा था. उनका मन बदलने लगा. लेकिन एक शख्स मुझसे काफी प्रभावित था. वो हर हाल में मलाना को देखना चाहता था. इन तमाम मुद्दों पर सुबह 4 बजे ठंडी हवाओं के बीच बातचीत हो रही थी. मैं तो मलाना गांव की सच्चाई जानने के वहां जाना चाहता था. लेकिन, बाकी लोग मलाना क्रीम का स्वाद लेने वहां जाना चाहते थे. मलाना क्रीम एक तरह का चरस होता है. पूरी दुनिया में यह मलाना क्रीम के नाम से मशहूर है. इस पूरे इलाके में जानेवाले ज्यादातर लोग चरस लेने यहां पहुंचते हैं. इस बीच ड्राइवर ने चरस की बिक्री करने की प्लानिंग बना ली. पहले उसने चरस की तारीफ कर उसे सभी को पिलाया.फिर,उसकी कीमत बताने लगा. दाम सुनकर तो मेरे होश उड़ गए. इतने में तो मेरा महीने भर का किचन का सामान होता है. बात करते-करते 5 हज गए. ड्राइवर ने कहा कि 2 और लोग पहुंच गए हैं. पहले उन्हें कसोल तक ड्राप करेगा, फिर मलाना चलेगा. 2 हजार में बात बन गई थी. मलाना जाने वाले लोगों को लगा कि इसी बहाने कसोल भी देख लेंगे. सभी लोग सूमो में सवार हो गए. भुंतर से निकलने वक्त अंधेरा था. गाड़ी खुल चुकी थी. अंदर बैठे सभी लोग मलाना क्रीम वाले थे, सिवाए मुझे छोड़कर. रास्ते में भी ड्राइवर अपने बिजनेस में लगा था. दूर-दूर से आनेवाले कस्टमर के बारे में जानकारी दे रहा था.

अंधेरा होने की वजह से कुछ पता नहीं चल रहा था. सामने से आ रही गाड़ियों की रोशनी से पहाड़ियों का एहसास हो रहा था. लग रहा था किसी सुनसान अनजान जगह की ओर बढ़ रहे हैं. भुंतर से 20 किमी की दूरी पर जरी है. यहां से कसोल और मलाना के रास्ते अलग हो जाते हैं. हमारी गाड़ी तो कसोल की ओर बढ़ रही थी. इस जगह की खूबसूरती भी अद्भुत है. पार्वती नदी के किनारे बसा यह कस्बा प्रकृति की गोद में अंगड़ाई लेता दिखता है. यहां कैंपिंग करने के लिए बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं. विदेशियों में इजरायल के लोग सबसे ज्यादा होते हैं. छोटे-छोटे रेस्तरां में इजरायली डिश खूब मिलता है. कई विदेशी तो कसोल को घर बना चुके हैं. यहां प्रकृति की गोद में सोते हैं. साथ ही कई काम भी करते हैं. कसोल से ट्रैकिंग के लिए कई जगह है. हालांकि, मेरा यहां रूकना नहीं हुआ. कुछ देर तक यहां रूकने के बाद मलाना की ओर निकल पड़े.
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